गुरूवार, 15 अक्टूबर 2026 |
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रायपुर : मातृ-रूपेण संस्थिता (Form of a Mother)... : जब माँओं ने बचाई एक माँ की जान

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Narayan Singh Jigyasu

7 hours ago 34 views
जब माँओं ने बचाई एक माँ की जान

नवरात्रि में मातृशक्ति का जीवनरक्षक स्वरूप: अम्बेडकर अस्पताल की महिला चिकित्सकों ने बचाई माँ की जान

बच्चेदानी और मूत्राशय फटने से गंभीर थी 32 वर्षीय महिला की हालत, पांच घंटे चली जटिल सर्जरी; 10 यूनिट रक्त चढ़ाने और दो दिन वेंटिलेटर पर रखने के बाद मिली जिंदगी

रायपुर। नवरात्रि में हम माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं और नारी शक्ति के सामर्थ्य को नमन करते हैं। इसी मातृशक्ति का एक प्रेरक स्वरूप पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अम्बेडकर अस्पताल, रायपुर में देखने को मिला, जहाँ महिला चिकित्सकों की टीम ने अपने चिकित्सकीय कौशल, साहस और समर्पण से एक माँ को नया जीवन दिया। वह भी तब, जब गंभीर प्रसूति जटिलता से जूझ रही 32 वर्षीय महिला की बच्चेदानी और मूत्राशय बुरी तरह फट गए थे। गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो चुकी थी और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला की जान पर बन आई थी। ऐसे कठिन समय में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम ने लगभग पांच घंटे तक जटिल सर्जरी की। मरीज को 10 यूनिट रक्त एवं रक्त घटक (Blood components) चढ़ाए गए। 

इसके बाद दो दिनों तक वेंटिलेटर पर गहन उपचार चला। आखिरकार चिकित्सकों के अथक प्रयास सफल हुए और महिला स्वस्थ होकर अपने परिवार के पास लौट गई। नवरात्रि में नारी शक्ति के साहस, समर्पण और सम्मान का इससे बेहतर उदाहरण क्या होगा कि एक ओर देवी स्वरूपा माँ की आराधना हो रही है, तो दूसरी ओर महिला चिकित्सकों  ने अपने ज्ञान, कौशल और सेवा भाव से एक माँ का जीवन बचाने के लिए अथक प्रयास करते हुए उसे मौत के मुँह से वापस लेकर आने में सफलता प्राप्त(Snatched from the jaws of death) की। आज की स्थिति में मरीज स्वस्थ्य होकर डिस्चार्ज लेकर अपने घर चली गई है। 

नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने इस मौके पर कहा कि नवरात्रि हमें शक्ति, साहस और करुणा का संदेश देती है। अम्बेडकर अस्पताल में एक माँ के जीवन को बचाने की यह घटना; शक्ति केवल आराधना में नहीं, सेवा में भी है, इसी भावना को जीवंत करती है। जहाँ महिला चिकित्सकों ने अपने ज्ञान और अनुभव से एक गंभीर मरीज की जान बचाने का हरसंभव प्रयास किया, वहीं विभिन्न विभागों की टीम ने एकजुट होकर चिकित्सा सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया l वहीं, सर्जरी विभाग की डॉ. प्राची के सहयोग से क्षतिग्रस्त मूत्राशय की मरम्मत की गई। निश्चेतना विभाग से डॉ. अमृता की टीम ने भी मरीज की स्थिति को नियंत्रित रखने और सर्जरी के दौरान आवश्यक चिकित्सकीय सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लगभग पांच घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी के दौरान मरीज को कुल 10 यूनिट रक्त एवं रक्त घटकों का आधान (Blood and Blood Component Transfusion) किया गया। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और चिकित्सकों के त्वरित निर्णय ने इस चुनौतीपूर्ण उपचार को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

ऑपरेशन के बाद भी जारी रही जीवन बचाने की जंग

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति गंभीर बनी हुई थी। उसे वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता पड़ी और क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में भर्ती किया गया। यहाँ डॉ. ओ. पी. सुंदरानी की टीम की देखरेख में दो दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट के साथ गहन चिकित्सा प्रदान की गई।

स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के साथ निश्चेतना, क्रिटिकल केयर, सर्जरी, ब्लड बैंक और नर्सिंग टीम ने लगातार समन्वय के साथ उपचार जारी रखा। निरंतर निगरानी और सामूहिक प्रयासों से मरीज की स्थिति में सुधार हुआ। अंततः वह खतरे से बाहर आई और स्वस्थ होकर अपने घर लौट गई।

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