शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 |
Advertisement

बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता का प्रतीक : रायपुर : राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं और जनजातीय संस्कृति की सराहना की

N

Narayan Singh Jigyasu

10 hours ago 67 views
रायपुर : राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं और जनजातीय संस्कृति की सराहना की

माओवाद से मुक्त बस्तर में अब नवनिर्माण और विकास की बारी - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

अब मांझियों कोे 5000 रूपए और चालकियों को 3500 रूपए मिलेगा मासिक मानदेय

रायपुर, 23 अक्टूबरl राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने बस्तर दशहरा की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव, सामूहिक आस्था, सामाजिक समरसता और जनजातीय विरासत का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह अनूठा उत्सव विभिन्न समुदायों को एक सूत्र में बांधने और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को संरक्षित रखने का उत्कृष्ट उदाहरण है।

राष्ट्रपति ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि बस्तर दशहरा जैसे विश्वप्रसिद्ध उत्सव में शामिल होना उनके लिए विशेष प्रसन्नता का विषय है। इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विभिन्न गोत्रों, समुदायों और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता रहती है। रथ निर्माण से लेकर रथ खींचने, पूजा-अर्चना और विभिन्न अनुष्ठानों तक प्रत्येक समुदाय अपनी परंपरागत जिम्मेदारी का निर्वहन करता है। यह सामूहिक सहभागिता सामाजिक एकता, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक निरंतरता का असाधारण उदाहरण है।

मुरिया दरबार लोकतांत्रिक परंपराओं का उत्कृष्ट उदाहरण-राष्ट्रपति

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बस्तर दशहरा के अंतर्गत आयोजित होने वाले मुरिया दरबार की परंपरा को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं, आवश्यकताओं और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं। सामूहिक संवाद के माध्यम से निकाले गए समाधान समाज की खुशहाली और आपसी सहयोग का मार्ग प्रशस्त करते हैं। ऐसी परंपराएं भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती हैं l

मुख्यमंत्री ने कहा कि जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल प्रारंभ किया गया है तथा गीदम में मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू हो गया है। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से बस्तर को देश का अग्रणी संभाग बनाने तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने माँ दंतेश्वरी, माँ मावली और बस्तर अंचल के समस्त ग्राम देवी-देवताओं को नमन करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी अवधि, विशिष्ट परंपराओं, आस्था और व्यापक जनभागीदारी के कारण देश के अन्य उत्सवों से अलग पहचान रखता है। लगभग 75 दिनों तक चलने वाला यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की जीवंत सांस्कृतिक पहचान है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने परंपरागत प्रतिनिधियों के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मांझियों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये तथा चालकी का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये किया गया है। यह निर्णय बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने वाले परंपरागत प्रतिनिधियों के योगदान के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री राम विचार नेताम, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाडे़, बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, कांकेर सांसद भोजराज नाग, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, विधायक कोण्डागांव लता उसेंडी, महापौर संजय पाण्डे सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, एसपी शलभ सिन्हा सहित पारंपरिक मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरिन, नाइक-पाइक और बस्तर दशहरा समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे l

शेयर करें

जरूरी खबरें

संबंधित खबरें

244
पेज 20 / 41