रविवार, 8 नवम्बर 2026 |
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दीवाली पर मां लक्ष्मी को पंचामृत स्नान कराने का है विशेष महत्व, जानें दूध-दही से लेकर शहद तक 5 चीजों का धार्मिक महत्व और पूजा विधि

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दीवाली पर मां लक्ष्मी को पंचामृत स्नान कराने का है विशेष महत्व, जानें दूध-दही से लेकर शहद तक 5 चीजों का धार्मिक महत्व और पूजा विधि

दीवाली का त्योहार सिर्फ दीप जलाने और घर सजाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह मां लक्ष्मी की कृपा पाने और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगने का भी विशेष अवसर है। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के साथ कई धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। इन्हीं में से एक है मां लक्ष्मी को पंचामृत स्नान कराना। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली पर विधि-विधान से माता का पंचामृत अभिषेक करने से घर में सुख-शांति, खुशहाली और समृद्धि बनी रहती है। तो आइए जानते हैं पंचामृत क्या है, इसके पांच तत्वों का क्या महत्व है और मां लक्ष्मी को पंचामृत स्नान कराने की सही विधि क्या है।

क्या है पंचामृत और क्यों हैं इसके पांचों तत्व खास?

दरअसल, पंचामृत का अर्थ होता है पांच अमृत। इसे दूध, दही, घी, शहद और शक्कर या मिश्री को मिलाकर तैयार किया जाता है। कुछ पूजा परंपराओं में इसमें गंगाजल भी मिलाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में पंचामृत के प्रत्येक तत्व को विशेष महत्व दिया गया है।

सबसे पहले बात दूध की करें तो इसे शुद्धता, पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। वहीं दही समृद्धि, स्थिरता और आरोग्य का प्रतीक है। घी को धन, वैभव और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। शहद मधुर वाणी, प्रेम और सफलता का प्रतीक माना जाता है, जबकि मिश्री जीवन में मिठास और खुशियों का संदेश देती है। वहीं गंगाजल को आध्यात्मिक शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माना गया है।

दीवाली पर क्यों खास है मां लक्ष्मी का पंचामृत अभिषेक?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसी वजह से दीपावली पर माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन भक्त माता को पंचामृत से स्नान कराकर धन, वैभव, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं। मान्यता है कि दीपावली की रात शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से लक्ष्मी पूजन करने से घर में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है। पंचामृत अभिषेक इसी श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

मां लक्ष्मी को पंचामृत स्नान कराने की सही विधि

अब बात करते हैं पंचामृत अभिषेक की सही पूजा विधि की। सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें और मां लक्ष्मी की प्रतिमा को स्वच्छ चौकी पर स्थापित करें। इसके बाद एक साफ बर्तन में दूध, दही, घी, शहद और मिश्री मिलाकर पंचामृत तैयार कर लें।

अब पूरे श्रद्धा भाव से माता की प्रतिमा पर पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद स्वच्छ जल या गंगाजल से प्रतिमा को स्नान कराएं। फिर साफ कपड़े से प्रतिमा को पोंछकर वस्त्र, चंदन, फूल, अक्षत और माला अर्पित करें। अंत में धूप-दीप जलाकर मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें और विधि-विधान से आरती करें।

हालांकि, ध्यान रखें कि पंचामृत अभिषेक के लिए ऐसी प्रतिमा का ही इस्तेमाल करें, जिसका स्नान कराना उचित हो। धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार पूजा विधि में अंतर भी हो सकता है।

इस तरह दीपावली पर पंचामृत अभिषेक के जरिए भक्त मां लक्ष्मी के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना करते हैं।

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