नावी पिल्ले को ओस्लो में किया गया सम्मानित : भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी महिला को मिला नोबेल शांति पुरस्कार
Narayan Singh Jigyasu
भारतीय तमिल मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद्, 85 वर्षीय मानवाधिकार वकील को आज 9 अक्टूबर 2026 को ओस्लो में नोबेल शांति पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया।
क्यों मिला पुरस्कार?
नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी के अध्यक्ष जोर्गन वाटने फ्राइडनेस ने कहा - "शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए"।
- युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के मामलों में न्याय सुनिश्चित कराने में अहम भूमिका
- "जब युद्धों की संख्या बढ़ रही है, तब अंतरराष्ट्रीय कानून शांति के लिए जरूरी है, न कि सिर्फ पूरक"
कौन हैं नावी पिल्ले?
- जन्म: 23 सितंबर 1941, डरबन, दक्षिण अफ्रीका में भारतीय तमिल परिवार में
- 1967 में नेटाल प्रांत में लॉ प्रैक्टिस शुरू करने वाली पहली महिला, नेल्सन मंडेला समेत रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का बचाव किया
- दक्षिण अफ्रीका हाईकोर्ट की पहली अश्वेत महिला जज
- इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल फॉर रवांडा की अध्यक्ष, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट की जज, 2008-2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त
- वर्तमान में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में म्यांमार नरसंहार केस की जज
- रवांडा नरसंहार में बलात्कार को नरसंहार के कृत्य के रूप में स्थापित करने वाला ऐतिहासिक फैसला दिया
पुरस्कार राशि और समारोह
- 1.2 मिलियन डॉलर (1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना), मेडल और डिप्लोमा
- 10 दिसंबर को ओस्लो में अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर समारोह
- इस साल 287 नामांकन आए थे, ट्रम्प भी दावेदार थे
- यह शांति पुरस्कार का 125वां संस्करण है
भारतीय कनेक्शन
तमिल मूल की होने से पूरे भारत और तमिल डायस्पोरा में जश्न। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय की पहली महिला जिन्हें ये सर्वोच्च सम्मान मिला।