सोमवार, 14 सितम्बर 2026 |
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पुलिस को आदेश देने वाले बहुत मिले : पुलिस की बात सुनने वाला गृह मंत्री कितनों ने देखा है?

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Narayan Singh Jigyasu

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पुलिस की बात सुनने वाला गृह मंत्री कितनों ने देखा है?

कर्नाटक में गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने पुलिस के साथ संवाद की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा होनी चाहिए। 1,200 से ज्यादा पुलिसकर्मी। करीब 7 घंटे का संवाद। कॉन्स्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर तक। न कोई लंबा भाषण, न सिर्फ वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और न ही ऊपर से नीचे तक आदेशों की प्रक्रिया।

इस बार पुलिसकर्मियों को बोलने दिया गया। कॉन्स्टेबल ने अपनी बात रखी। हेड कॉन्स्टेबल ने अपनी समस्या बताई। PSI और इंस्पेक्टर ने अपने अनुभव साझा किए।

और सबसे अहम बात, उनकी आवाज सीधे गृह मंत्री तक पहुंची। आमतौर पर व्यवस्था में सबसे नीचे काम करने वाला कर्मचारी सबसे ज्यादा जमीन की सच्चाई जानता है, लेकिन उसकी आवाज ऊपर तक पहुंचते-पहुंचते कई स्तरों से गुजरती है।

प्रियंक खड़गे ने इस दूरी को कम करने की कोशिश की।

क्योंकि अगर सरकार को पुलिस की वास्तविक समस्याएं समझनी हैं, तो सिर्फ पुलिस के बड़े अधिकारियों से बात करके काम नहीं चलेगा। उस कॉन्स्टेबल से भी पूछना पड़ेगा जो घंटों सड़क पर ड्यूटी करता है। उस पुलिसकर्मी से भी पूछना पड़ेगा जो थाने में रोज जनता की शिकायत सुनता है। उस अधिकारी से भी पूछना पड़ेगा जो कानून-व्यवस्था की चुनौती को जमीन पर संभालता है।

यही फर्क है, सिर्फ शासन करने और सुनकर शासन करने में। यह कार्यक्रम सिर्फ एक बैठक नहीं थी। यह संदेश था कि पुलिस सुधार का फैसला पुलिसकर्मियों को सुने बिना नहीं हो सकता। जब फ्रंटलाइन पर खड़ा पुलिसकर्मी सीधे अपनी बात सरकार तक पहुंचा सकता है, तो इससे सिर्फ पुलिसकर्मी का मनोबल नहीं बढ़ता, बल्कि व्यवस्था और जनता के बीच भरोसा भी मजबूत होता है। कर्नाटक सरकार ने दिखाया है कि सुधार सिर्फ ऊपर से थोपे नहीं जाते। सुधार जमीन से जुड़े लोगों को साथ लेकर किए जाते हैं। और यही वजह है कि कर्नाटक का मॉडल सिर्फ योजनाओं की बात नहीं करता, बल्कि संवाद और भागीदारी की राजनीति की भी बात करता है।

जहां दूसरी सरकारें भाषण देती हैं, वहां कर्नाटक सरकार सुनने की कोशिश कर रही है। जहां व्यवस्था में आवाज ऊपर तक पहुंचने में समय लगता है, वहां सीधे संवाद का रास्ता बनाया जा रहा है।

प्रियंक खड़गे ने पुलिस सुधार की नींव में एक महत्वपूर्ण चीज जोड़ी है, Listening, क्योंकि एक अच्छी सरकार सिर्फ यह नहीं बताती कि वह क्या करेगी। एक अच्छी सरकार यह भी सुनती है कि जमीन पर काम करने वाले लोग क्या चाहते हैं। कर्नाटक मॉडल, सिर्फ काम करने का नहीं, लोगों को सुनकर काम करने का मॉडल।

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Ashish Saini

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