शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 |
Advertisement

डीईपीडब्लूडी ने सुगम्य भारत के सरकार के समग्र दृष्टिकोण का आह्वान किया : सुगम्यता को बाद का विचार नहीं बनाया जा सकता है

N

Narayan Singh Jigyasu

6 hours ago 19 views
सुगम्यता को बाद का विचार नहीं बनाया जा सकता है

नई दिल्ली l “सुगम्यता को बाद का विचार नहीं बनाया जा सकता, और न ही इसे किसी एक विभाग या एजेंसी पर छोड़ा जा सकता है। इसके लिए सिविल सोसाइटी की साझेदारी के साथ सभी मंत्रालयों, विभागों और सरकार के सभी स्तरों पर एक ठोस प्रयास की आवश्यकता है।” यह संदेश दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडी) की अपर सचिव, आईएएस सुश्री मनमीत कौर नंदा का था, जब उन्होंने नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित “सुगमता का संकल्प” परामर्श बैठक में भारत भर में सुगम्यता को आगे बढ़ाने के लिए एक समन्वित, सरकार के समग्र दृष्टिकोण का आह्वान किया।

इस बात पर जोर देते हुए कि सुगम्यता शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार, परिवहन, वित्तीय सेवाओं और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे तक फैली हुई है, सुश्री नंदा ने रेखांकित किया कि एक क्षेत्र में प्रगति अन्य क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई पर निर्भर करती है। उन्होंने राज्यों द्वारा सुगम्यता को वह प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया जिसके वह योग्य है, तथा एक समावेशी और सुगम भारत के विजन को वास्तविकता में बदलने के लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करने के लिए कहा। उनके संदेश ने इस बात को पुष्ट किया कि सुगम्यता को बाद में जोड़े जाने या सुधारने के बजाय डिजाइन के चरण में ही शामिल किया जाना चाहिए।

सुगम्य भारत अभियान' की प्रगति का आकलन

डीईपीडब्लूडी, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 'द एसोसिएशन ऑफ पीपल विद डिसेबिलिटी (एपीडी), इंडिया' की साझेदारी में और इप्सोस के सहयोग से आयोजित इस परामर्श बैठक में 'सुगम्य भारत अभियान' की प्रगति का आकलन करने, निरंतर बनी हुई सुगम्यता संबंधी कमियों की पहचान करने और इसके अगले चरण की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने के लिए सरकार, दिव्यांगता क्षेत्र, अकादमिक जगत, अनुसंधान और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि एक साथ आए।

डीईपीडब्लूडी के संयुक्त सचिव गिरीश सी. होसुर ने सुगम्य भारत अभियान की यात्रा और उपलब्धियों को प्रस्तुत किया, जिसमें सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, परिवहन और डिजिटल सेवाओं में सुगम्यता को आगे बढ़ाने तथा पहल का नेतृत्व करने में विभाग की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। उनके प्रस्तुतीकरण ने आने वाले वर्षों में प्रगति को सुदृढ़ करने और कार्यान्वयन को मजबूत करने पर चर्चा के लिए पृष्ठभूमि तैयार की।

दिव्यांगजन मुख्य आयुक्त कार्यालय के आयुक्त एस. गोविंदराज ने इस बात पर जोर दिया कि सुगम्यता समय की मांग है। उन्होंने देश भर में सुगम्यता को आगे बढ़ाने में सुगम्य भारत अभियान के महत्व को रेखांकित किया और दिव्यांगजनों को प्रभावित करने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अब तक हासिल की गई प्रगति को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

शेयर करें

जरूरी खबरें

संबंधित खबरें

90
पेज 8 / 15