मंगलवार, 29 सितम्बर 2026 |
Advertisement

सभी हों साक्षर : विकसित भारत' की दिशा में भारत का सफ़र

N

Narayan Singh Jigyasu

4 hours ago 13 views
विकसित भारत' की दिशा में भारत का सफ़र

भारत में साक्षरता की बड़ी छलांग: पूर्ण साक्षरता की राह पर अग्रसर

नई दिल्ली। साक्षरता राष्ट्रीय विकास की नींव है। यह सिर्फ़ शैक्षिक प्रगति का पैमाना मात्र नहीं है, बल्कि यह लोगों को नए अवसर पाने, अर्थव्यवस्था में हिस्सा लेने और समाज में सार्थक रूप से जुड़ने में भी सहायता करती है। यूनेस्को साक्षरता को बुनियादी मानवाधिकार एवं समानता, न्याय, समावेश और कानून के शासन के प्रति सम्मान हासिल करने का महत्वपूर्ण साधन मानता है। पिछले आठ दशकों में भारत ने अपनी साक्षरता दर को बेहतर बनाने में उल्लेखनीय प्रगति की है। 1947 में, देश की समग्र साक्षरता दर सिर्फ़ 14% थी, जबकि महिलाओं की साक्षरता दर 8% पर बहुत कम थी। भारत ने साक्षरता को बेहतर बनाने और अपनी शिक्षा प्रणाली को मज़बूत करने के लिए कई पहल की हैं। सरकार ने सभी स्तरों पर शिक्षा में सुधार लाने और कुशल, परिस्थितियों के अनुसार ढलने में सक्षम और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल तैयार करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 शुरू की।

साक्षरता क्या है?

शिक्षा मंत्रालय स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने पहली बार साक्षरता को इस तरह परिभाषित किया है: "पहचानने, समझने, व्याख्या करने और रचना करने के साथ ही डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल के लिए समझ के साथ पढ़ने, लिखने और हिसाब-किताब करने की क्षमता।" यह किसी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में 95% साक्षरता को पूर्ण साक्षरता के बराबर मानता है।

वैश्विक संदर्भ में, यूनेस्को साक्षरता को पढ़ने, लिखने और संख्याओं का उपयोग करने की क्षमता के साथ-साथ तेज़ी से तकनीकी और सूचना-समृद्ध वातावरण में समस्याओं को हल करने के लिए डिजिटल सामग्री का उपयोग करने की क्षमता के रूप में परिभाषित करता है - एक बुनियादी कौशल है जो कार्य करने, सीखने और जीवन में लोगों की भागीदारी के लिए केंद्रीय पक्ष है। यह शिक्षा के अधिकार का ज़रूरी घटक है और अन्य मानवाधिकारों का लाभ उठाने के लिए पूर्व-आवश्यकता है।

साक्षरता और शिक्षा में प्रगति को मापना

भारत की साक्षरता दर में 1951 के बाद से उल्लेखनीय प्रगति हुई है; यह 1951 में 18.32% से बढ़कर 2011 में 74.04% हो गई। पुरुषों की साक्षरता दर 27.15% से बढ़कर 82.14% हो गई, जबकि महिलाओं की साक्षरता दर में भी काफ़ी बढ़ोतरी हुई और यह 8.86% से बढ़कर 65.46% हो गई।

पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) 2025 के अनुसार, शहरी इलाकों में 7 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों की साक्षरता दर 89% और 5 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों की साक्षरता दर 88% रही। शहरी इलाकों में 7 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों में पुरुषों की साक्षरता दर 93.1% और महिलाओं की 84.8% रही। ग्रामीण इलाकों में 7 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों की साक्षरता दर 77.4% और 5 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों की 76.4% रही। ग्रामीण आबादी में 7 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों में पुरुषों की साक्षरता दर 84.8% और महिलाओं की 70.3% रही। इस सर्वे के अनुसार, देश की कुल साक्षरता दर 81.1% है।

साक्षरता में सुधार के साथ-साथ, सरकार ने स्कूल में दाखिले, बच्चों के स्कूल में बने रहने और अगली कक्षा में जाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए भी कदम उठाए हैं। 2014-15 के बाद से सकल नामांकन अनुपात (जीईआर), एक स्तर से दूसरे स्तर पर जाने (ट्रांज़िशन) और स्कूल में बने रहने (रिटेंशन) की दरों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। UDISE+ रिपोर्ट (2025-26) के अनुसार:

विद्यालय में दाखिला: स्कूलों में 24.72 करोड़ से ज़्यादा विद्यार्थी नामांकित थे।

सकल नामांकन अनुपात (जीईआर): यह शुरुआती स्तर (फाउंडेशनल स्टेज) पर 42.8%, तैयारी के स्तर (प्रिपरेटरी स्टेज) पर 91.7%, मिडिल स्टेज पर 89.6% और सेकेंडरी स्टेज पर 71.7% था। ड्रॉपआउट दरें (स्कूल छोड़ने की दरें) तैयारी के स्तर पर 1.8%, मिडिल स्टेज पर 3.6% और सेकेंडरी स्टेज पर 7.0% थीं।

रिटेंशन दरें (स्कूल में बने रहने की दरें) शुरुआती स्तर के लिए 98.5%, तैयारी के स्तर के लिए 91.1%, मिडिल स्टेज के लिए 83.7% और सेकेंडरी स्टेज के लिए 51.9% थीं।

ट्रांज़िशन दरों में सुधार हुआ; 99.2% छात्र शुरुआती स्तर से तैयारी के स्तर पर, 93.8% तैयारी के स्तर से मिडिल स्टेज पर और 88.3% मिडिल स्टेज से सेकेंडरी स्टेज पर पहुँचे।

शेयर करें

संबंधित खबरें

80
पेज 8 / 14