बुधवार, 30 सितम्बर 2026 |
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शिखर सम्मेलन में जारी की गई यूट्यूब इम्पैक्ट रिपोर्ट : यूट्यूब इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन

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Narayan Singh Jigyasu

5 hours ago 33 views
यूट्यूब इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन

नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित यूट्यूब इम्पैक्ट समिट 2026, जिसका विषय था “को-क्रिएटिंग : इंडियाज डिजिटल लीडरशिप एंड द ऑरेंज इकोनॉमी”, को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आर्थिक विकास, रोजगार और वैश्विक सांस्कृतिक पहुंच को बढ़ावा देने में भारत की डिजिटल और रचनात्मक अर्थव्यवस्था की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। इस शिखर सम्मेलन में नीति निर्माता, प्रौद्योगिकी क्षेत्र के नेता, रचनाकार, उद्यमी और नवप्रवर्तक एक साथ आए।

सृजनात्मक अर्थव्यवस्था विकास और रोजगार को बढ़ावा

शिखर सम्मेलन में जारी की गई यूट्यूब इम्पैक्ट रिपोर्ट के अनुसार, यूट्यूब के रचनात्मक ईकोसिस्टम ने 2025 में भारत की जीडीपी में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दिया और देशभर में 9.6 लाख से अधिक पूर्णकालिक समकक्ष नौकरियों के सृजन में सहायता की। मंत्री ने उल्लेख किया कि भारत में निर्मित सामग्री को देखने के समय का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भारत के बाहर के दर्शकों का होता है, जबकि 18,000 से अधिक भारतीय यूट्यूब चैनलों ने एक मिलियन सब्सक्राइबर का आंकड़ा पार कर लिया है ।

डिजिटल इंडिया से क्रिएटिव इंडिया तक

डॉ. मुरुगन ने डिजिटल भुगतान, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, किफायती कनेक्टिविटी और डिजिटल शिक्षा के माध्यम से भारत के डिजिटल परिवर्तन पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपभोक्ताओं से रचनाकारों, उपयोगकर्ताओं से नवप्रवर्तकों और सामग्री उपभोग से बौद्धिक संपदा सृजन की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया ।

उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी ने अवसरों के भौगोलिक परिदृश्य को बदल दिया है, जिससे हर जिले, भाषा और समुदाय की प्रतिभाएं वैश्विक दर्शकों तक पहुंच सकती हैं।

ऑरेंज इकोनॉमी को सुदृढ़ बनाना

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के "भारत में सृजन करो, दुनिया के लिए सृजन करो" के दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए मंत्री ने ऑरेंज इकोनॉमी के तीन स्तंभों - विषयवस्तु, सृजनात्मकता और संस्कृति - पर प्रकाश डाला ।

उन्होंने कहा कि सृजनात्मकता मनोरंजन से भी आगे तक फैली हुई है और इससे रोजगार, व्यवसाय, बौद्धिक संपदा, निर्यात और सांस्कृतिक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।

डॉ. मुरुगन ने कहा कि AI रचनाकारों को लेखन, अनुवाद, संपादन, एनीमेशन, रचना, डिजाइन और वितरण में सहायता कर सकता है, जबकि मानवीय कल्पना रचनात्मकता के केंद्र में बनी रहती है।

उन्होंने इस बात पर फिर से जोर दिया कि AI को रचनाकारों को सशक्त बनाना चाहिए न कि उनकी जगह लेनी चाहिए, साथ ही उभरती प्रौद्योगिकियों के सुलभ, जिम्मेदार और नैतिक उपयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया। इस शिखर सम्मेलन में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT) के सहयोग से विकसित की गई "क्रिएट विद एआई" फिल्मों का अनावरण भी किया गया।

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