रविवार, 4 अक्टूबर 2026 |
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850 गांव पहली बार नियमित बस सेवा से जुड़े : विशेष लेख : बस पहुंची तो गांवों में लौटी नई उम्मीद

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Narayan Singh Jigyasu

2 hours ago 2 views
विशेष लेख : बस पहुंची तो गांवों में लौटी नई उम्मीद

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से दूरस्थ अंचलों में आसान हुई जिंदगी की राह

बस्तर और सरगुजा संभाग के 13 जिलों में 106 मार्गों पर दौड़ रहीं 107 बसें, शिक्षा-स्वास्थ्य से लेकर हाट-बाजार और प्रशासनिक मुख्यालय तक पहुंच हुई आसान

रायपुर। गांव की सड़क पर दूर से आती बस और उसके हॉर्न की आवाज...। बच्चे उत्साह से हाथ हिलाते हैं, ग्रामीणों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। जिन गांवों के लोगों के लिए कभी बस का आना ही बड़ी बात थी, वहां आज नियमित बस सेवा उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रही है। यह बदलाव केवल आवागमन आसान होने का नहीं है, बल्कि दूरस्थ गांवों के शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, रोजगार और प्रशासनिक केंद्रों से जुड़ने का है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर शुरू हुई मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने अपने पहले वर्ष में प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 04 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से शुरू हुई इस योजना के प्रथम चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग को शामिल किया गया। आज 13 जिलों के 106 चयनित मार्गों पर 107 बसें संचालित हो रही हैं और 850 ऐसे नए गांवों तक पहली बार नियमित यात्री बस सेवा पहुंची है, जहां पहले यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

24 लाख किलोमीटर का सफर, हजारों ग्रामीणों की राह हुई आसान

योजना के अंतर्गत संचालित 107 बसों ने एक वर्ष में लगभग 24 लाख किलोमीटर की दूरी तय की है। ये बसें प्रतिदिन करीब 17,500 किलोमीटर का सफर कर रही हैं। इन आंकड़ों के पीछे उन ग्रामीण परिवारों की बदलती जिंदगी है, जिन्हें कभी हाट-बाजार, अस्पताल, स्कूल, तहसील, ब्लॉक तक जाने के लिए किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

दूरस्थ और कम यात्री संख्या वाले ग्रामीण मार्गों पर नियमित बस संचालन को व्यावहारिक बनाने के लिए राज्य सरकार बस ऑपरेटरों को वित्तीय सहायता भी दे रही है। योजना में प्रथम वर्ष ₹26 प्रति किलोमीटर, द्वितीय वर्ष ₹24 प्रति किलोमीटर और तृतीय वर्ष ₹22 प्रति किलोमीटर की दर से सहायता का प्रावधान है। यह सहायता तीन वर्ष तक दी जाएगी। साथ ही अधिकतम तीन वर्ष तक मासिक मोटरयान कर में छूट का प्रावधान भी किया गया है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम यात्री संख्या के कारण दूरस्थ ग्रामीण मार्गों पर बस सेवा प्रभावित न हो और लोगों को नियमित एवं निर्बाध सार्वजनिक परिवहन मिलता रहे।

तकनीक से निगरानी, मोबाइल पर बस की जानकारी

योजना को तकनीक से भी जोड़ा गया है। बसों की लाइव ट्रैकिंग, ट्रिप, रूट और स्टॉपेज की जानकारी के लिए पृथक डडळठल् पोर्टल विकसित किया गया है। टस्ज्क् (ळच्ै) के जरिए परिवहन विभाग के कंट्रोल एवं कमांड सेंटर से बसों की निगरानी की जा रही है। बस ऑपरेटरों को वित्तीय सहायता का भुगतान भी ऑनलाइन टस्ज्क् रिपोर्ट के आधार पर किया जा रहा है।

यात्रियों की सुविधा के लिए ‘बस संगवारी’ ऐप के माध्यम से बसों की समय-सारिणी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को केवल विस्तारित ही नहीं, बल्कि तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है।

बस के साथ गांव तक पहुंच रही विकास की नई राह

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के एक वर्ष की उपलब्धि को केवल बसों और किलोमीटर के आंकड़ों में नहीं देखा जा सकता। इसकी वास्तविक तस्वीर उस विद्यार्थी की सुविधा में दिखाई देती है, जो अब समय पर स्कूल पहुंच सकता है; उस महिला के अनुभव में दिखाई देती है, जिसे कार्यस्थल तक जाने के लिए अब लिफ्ट का इंतजार नहीं करना पड़ता।

आभार

सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक 

नूतन सिदार, सहायक संचालक

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