रविवार, 18 अक्टूबर 2026 |
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भारत का पोषक तत्वों से भरपूर बैंगनी आलू कुफरी जामुनिया

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Narayan Singh Jigyasu

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भारत का पोषक तत्वों से भरपूर बैंगनी आलू  कुफरी जामुनिया

नई दिल्ली l कई आबादी में पर्याप्त कैलोरी सेवन के बावजूद छिपी भूख (हिडन हंगर) एक बड़ी पोषण चुनौती बनी हुई है। दैनिक भोजन के माध्यम से आवश्यक विटामिन और खनिजों की खपत बढ़ाने के लिए जैव-संवर्धित (बायोफोर्टिफाइड) फसलों को विकसित किया जा रहा है। इस संदर्भ में, ICAR-CPRI (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान) ने पोषक तत्वों से भरपूर रंगीन आलू की किस्में विकसित की हैं, जिनमें कुफरी नीलकंठ, कुफरी माणिक और कुफरी जामुनिया शामिल हैं। इन किस्मों में एंथोसायनिन, आयरन और जिंक जैसे महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट और सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद हैं। इनमें कुफरी जामुनिया विटामिन सी, एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड के उच्च स्तर के कारण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्शाती है। इसका बेहतर पोषण प्रोफाइल, आकर्षक बैंगनी गूदा और उपभोक्ताओं के बीच मजबूत आकर्षण इसे छिपी भूख से निपटने और पोषण सुरक्षा में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण किस्म बनाते हैं।

कैलोरी से परे आलू: छिपी भूख का समाधान

पर्याप्त कैलोरी सेवन के बावजूद छिपी भूख एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब लोग पर्याप्त मात्रा में भोजन तो करते हैं, लेकिन उनके आहार में आवश्यक विटामिन और खनिजों की कमी होती है। इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक बेहतर पोषण मूल्य वाली जैव-संवर्धित फसलों को तेजी से विकसित कर रहे हैं। बायोफोर्टिफिकेशन पादप प्रजनन (प्लांट ब्रीडिंग) के माध्यम से फसलों की पोषक तत्व सामग्री में सुधार करता है, जिससे खाद्य पदार्थ प्राकृतिक रूप से आवश्यक पोषक तत्वों के उच्च स्तर प्रदान करने में सक्षम होते हैं। पारंपरिक खाद्य सुदृढ़ीकरण (फूड फोर्टिफिकेशन) के विपरीत-जिसमें प्रसंस्करण के दौरान पोषक तत्व जोड़े जाते हैं-बायोफोर्टिफिकेशन पोषण को सीधे फसल में समाहित करता है। यह आमतौर पर खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में पोषण की गुणवत्ता में सुधार करने का एक स्थायी और किफायती तरीका है। साथ ही, यह दीर्घकालिक पोषण सुरक्षा को भी सुदृढ़ करता है।

बायोफोर्टिफिकेशन अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण परिणाम संवर्धित पोषण मूल्य वाली रंगीन आलू की किस्मों का विकास रहा है। इनमें लाल, बैंगनी और नीले गूदे वाले आलू शामिल हैं। इन आलुओं में एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड जैसे प्राकृतिक पिगमेंट होते हैं, जो इन्हें इनका विशिष्ट रंग प्रदान करते हैं। रंगीन आलू एंटीऑक्सीडेंट तथा आयरन और जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।

ICAR-CPRI द्वारा विकसित पोषक तत्वों से भरपूर रंगीन आलू की किस्में

ICAR-CPRI (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद - केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान) ने निम्नलिखित पोषक तत्वों से भरपूर रंगीन आलू की किस्में विकसित की हैं:

कुफरी नीलकंठ ICAR-CPRI द्वारा विकसित पहली बैंगनी छिलके वाली विशेष आलू की किस्म थी, जिसे 2018 में जारी किया गया था। यह किस्म पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में खेती के लिए उपयुक्त है। यह अपने उच्च एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जानी जाती है और सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त है।

कुफरी माणिक को 2021 में जारी किया गया था। यह गोल आकार, मध्यम आंखें और पीले गूदे वाले आकर्षक, गहरे लाल रंग के कंद पैदा करता है। यह किस्म पोषक तत्वों से भरपूर है और इसमें एंथोसायनिन, जिंक तथा आयरन उच्च मात्रा में पाया जाता है।

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