मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 |
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गरिमा के साथ कला का संचार : नवाचार ने भारत के सार्वजनिक शौचलयों को दिया नया स्वरूप

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Narayan Singh Jigyasu

38 minutes ago 1 views
नवाचार ने भारत के सार्वजनिक शौचलयों को दिया नया स्वरूप

नई दिल्ली। बीते कुछ वर्ष में, भारत के शहरों ने सार्वजनिक स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उपलब्धता में सुधार के साथ-साथ स्वच्छता और सुरक्षा व पहुंच बेहतर करते हुए, शहर सार्वजनिक शौचालयों को अधिक समावेशी और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने के लिए कई नवाचारी तरीके अपना रहे हैं।

इन्हीं प्रयासों के आधार पर, स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) का शुभारंभ 2 अक्टूबर 2014 को किया गया था, जिसने पूरे भारत में स्वच्छता में नवाचार को एडवांस किया है। शहरों ने शौचलय बनाए हैं, जागरूकता फैलाई है और खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाने के लिए काम किया है। इनमें से कई ओडीएफ+ और ओडीएफ++ का दर्जा पाने के लिए इसके आगे भी गए हैं। 2022 में, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी (एसबीएम-यू) में शौचालय 2.0 पहल ने एक नया स्तर छुआ है। इसका उद्देश्य सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय (सीटी/ पीटी) को सुरक्षित, स्वच्छ और सभी के लिए इस्तेमाल करने योग्य बनाना है। नागरिक अब स्वच्छता ऐप में ‘एसबीएम टॉयलेट लोकेटर’ के माध्यम से अपनी नजदीकी जगह पर इस सुविधा का पता लगा सकते हैं।

आज, यह बदलाव अप्रत्याशित स्थानों पर भी नजर आता है। एक पुरानी बस महिलाओं के लिए शौचालय बन गई है। प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल निर्माण सामग्री के तौर पर किया जा रहा है। एक व्यस्त बाजार में अब एक स्मार्ट लाउंज खुल गया है। एक छोटे शहर ने स्वच्छता संबंधी कचरे के सुरक्षित निपटान का तरीका खोज लिया है। तीर्थ स्थलों में सभी के लिए सुलभ सुविधाएं उपलब्ध हैं। ये सभी कहानियां मूलभूत सुविधाओं से लेकर सम्मान, सुरक्षा और नवाचार तक की यात्रा को दर्शाती हैं।

आधुनिक शौचालय: एक कबाड़ हो चुकी बस महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान बन गई

भीड़भाड़ वाले बस टर्मिनलों से गुजरने वाली महिलाओं को आमतौर पर साफ-सुथरा और निजी शौचालय ढूंढने में परेशानी होती है। कर्नाटक के बेंगलुरु में, एक पुरानी बस को इस जरूरत को पूरा करने के लिए नया रूप दिया गया। कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) के मैजेस्टिक बस टर्मिनल पर स्त्री शौचालय स्थापित किया गया है। कबाड़ में मिले वाहन से निर्मित यह शौचालय विशेष रूप से महिलाओं के लिए है।

इस शौचालय में तीन भारतीय-शैली के और दो पश्चिमी-शैली के कमोड हैं। सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन और एक भस्मक मासिक धर्म स्वच्छता में सहायक हैं। माताओं को अपने शिशुओं को दूध पिलाने और डायपर बदलने के लिए एक अलग स्थान दिया गया है। सेंसर लाइटें अपने से उत्पादित सौर ऊर्जा से चलती हैं। अपशिष्ट पदार्थ बस स्टेशन पर स्थित निकटतम सीवेज चैंबर में जाता है। यह शौचालय छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाली माताओं के लिए विशेष तौर पर उपयोगी साबित हुआ है।

नवी मुंबई के संपोषित शौचालय: पर्यावरण के प्रति जागरूक शहरी डिजाइन का एक आदर्श

क्या शहर के फेंके गए कचरे से सार्वजनिक शौचालय बनाया जा सकता है? नवी मुंबई ने यह साबित कर दिया है। नवी मुंबई नगर निगम (एनएमएमसी) ने सेक्टर 14, कोपरखैरणे में आकांक्षी शौचालय विकसित किए हैं। यह स्थान व्यस्त सार्वजनिक स्थल निसर्ग उद्यान के नजदीक स्थित है। रोजाना लगभग 8,000 से 9,000 लोग इस सुविधा का इस्तेमाल करते हैं।

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