गुरूवार, 10 सितम्बर 2026 |
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सुरक्षा व आर्थिक विकास को एक-दूसरे के पर्याय : भारत अपने पड़ोस में जिम्मेदार भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध

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Narayan Singh Jigyasu

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भारत अपने  पड़ोस में  जिम्मेदार भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध

नई दिल्ली। रक्षा राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र की सामूहिक सुरक्षा एवं समृद्धि के लिए सुरक्षित समुद्री मार्ग, नौवहन की स्वतंत्रता, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान और निर्बाध समुद्री व्यापार बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने भारत व श्रीलंका के बीच सहयोग को और विस्तारित करने का आह्वान किया, ताकि सुरक्षित एवं अनुकूल समुद्री वातावरण तैयार किया जा सके तथा उभरती समुद्री चुनौतियों का समय रहते सामना किया जा सके।

राजनाथ सिंह ने कहा कि इन चुनौतियों से समय रहते निपटना जरूरी है, ताकि वे विकास की प्राथमिकताओं और बेहतर भविष्य की दिशा में गंभीर बाधा न बन सकें। रक्षा मंत्री ने 9 सितंबर, 2026 को कोलंबो में श्रीलंका के रक्षा मंत्रालय की यात्रा के दौरान श्रीलंका के रक्षा उप मंत्री श्री अरुणा जयसेकरा, श्रीलंकाई सेना, नौसेना और वायु सेना के कमांडरों तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए अपने ये विचार व्यक्त किये।

रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा व आर्थिक विकास को एक-दूसरे से अलग करके नहीं देखा जा सकता, क्योंकि दोनों ही भूगोल और सुरक्षा से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका, दोनों ही देशों के लिए क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रमों के प्रति उदासीन रहना संभव नहीं है। श्री सिंह ने बताया कि भारत और श्रीलंका ने क्षमता निर्माण से लेकर संयुक्त सैन्य अभ्यासों तक विभिन्न पहलों के माध्यम से अपनी सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ किया है। हालांकि, उन्होंने समुद्री सहयोग पर विशेष ध्यान देते हुए दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रक्षा तथा रणनीतिक साझेदारी को और सशक्त करने की जरूरत है।

अपनी क्षमताओं को मजबूत करना होगा

राजनाथ सिंह ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक व क्षेत्रीय परिदृश्य से उत्पन्न नई चुनौतियों एवं खतरों से निपटने हेतु हमें मिलकर कार्य करने के लिए प्रभावी प्रोटोकॉल विकसित और लागू करने, अपनी क्षमताओं को मजबूत करने तथा अनुभव साझा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह एक सतत प्रक्रिया होनी चाहिए। हमें समुद्री क्षेत्र में करीबी और मजबूत साझेदारी के लिए नए तौर-तरीके विकसित करने होंगे। रक्षा मंत्री ने कहा कि यही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के महासागर (सभी क्षेत्रों में सुरक्षा एवं विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति) दृष्टिकोण का मूल आधार है। ‘आपसी’ और ‘समग्र’ जैसे शब्द तालमेल, सहयोग व मिलकर काम करने के महत्व को उजागर करते हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत एवं श्रीलंका एक ही समुद्री क्षेत्र से जुड़े हैं और समुद्री सुरक्षा कोई काल्पनिक अवधारणा नहीं, बल्कि एक वास्तविकता है, जो दोनों देशों के व्यापार, सुरक्षा तथा भविष्य को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि श्रीलंका भारत का मित्र पड़ोसी, पुराना दोस्त और भरोसेमंद साझेदार है। हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी किसी भी रणनीतिक चर्चा में दोनों देशों की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री सिंह ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत समुद्री सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए लाभकारी है, बल्कि क्षेत्र के सामूहिक विकास व सुरक्षा के उद्देश्य से भी बेहद जरूरी है।

राजनाथ सिंह ने समुद्री सहयोग, विशेष रूप से ‘खोज एवं बचाव’ अभियानों में हुई महत्वपूर्ण प्रगति का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से समुद्र में कई बहुमूल्य जानें बचाई गई हैं। उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका नशीली दवाओं की तस्करी, समुद्री डकैती तथा मानव तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं।

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